भारत ने निर्यात लक्ष्य को पार करते हुए 2021-22 में 417.8 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया

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वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने हाल ही में यह घोषित किया की मौजूदा वित्त वर्ष में भारत से व्यापारिक वस्तुओं का निर्यात 417.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें गैर-ईडीआई बंदरगाहों के आंकड़े शामिल नहीं है और यदि इस आंकड़े में उन्हें जोड़ दिया जाए तो इस आंकड़े के भारत के निर्यात इतिहास में एक सर्वकालिक उच्च 418 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने की संभावना है।

भारत ने मार्च 2022 में 40.38 अरब अमेरिकी डॉलर की सबसे अधिक मासिक माल निर्यात मूल्य हासिल किया है जो मार्च 2021 में 35.26 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 14.53% की वृद्धि और मार्च 2020 में 21.49 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 87.89% की वृद्धि है।

भारत के निर्यात में अप्रैल 2021 – मार्च 2022 में गैर-पेट्रोलियम वस्तुओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो कि 352.76 अरब अमेरिकी डॉलर थी। यह अप्रैल 2020 – मार्च 2021 में 266.00 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 32.62% की वृद्धि और अप्रैल 2019 – मार्च 2020 में 272.07 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 29.66% की वृद्धि है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के आह्वान के जवाब में भारत अब वास्तव में ‘स्थानीय से वैश्विक’ हो गया है। भारत जिस गति से ‘आत्म-निर्भरता’ हासिल कर रहा है, उस पर प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि इस प्रगति से प्रत्येक भारतीय को लाभ मिल रहा है। 

श्री पीयूष गोयल, वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा कपड़ा मंत्री

उन्होंने कहा कि भारत प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस शानदार लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहा है। वर्ष 2021-22 में भारत का विविध निर्यात पोर्टफोलियो भारत की विनिर्माण क्षमताओं के साथ-साथ अत्याधुनिक सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों में वृद्धि को दर्शाता है।

अप्रैल-मार्च 2020-21 की तुलना में अप्रैल-मार्च  2021-2022 के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज करने वाली प्रमुख वस्तुओं के निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद (152.1%), सूती धागे / कपड़े / मेडअप, हथकरघा उत्पाद आदि (55.1%), अन्य अनाज (52.2%), रत्न और आभूषण (49.6%), मानव निर्मित यार्न / फैब / मेडअप आदि (46.9%), इंजीनियरिंग सामान (45.5%), कॉफी (49%), इलेक्ट्रॉनिक सामान (40.5%), फ्लोर कवरिंग सहित जूट विनिर्माण (36.2%), चमड़ा और चमड़ा निर्माण (32.2%), कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन (32.0%), प्लास्टिक और लिनोलियम (31.1%), समुद्री उत्पाद (30.0%), सभी वस्त्रों का आरएमजी (29.9%), हस्तशिल्प खासकर हाथ से बने कालीन (22.0%) और अनाज की तैयारी तथा विविध संसाधित मद (21.9%) शामिल हैं।

वर्ष 2021-22 के दौरान निर्यात किए गए व्यापारिक वस्तुओं की विविध श्रेणी के अलावा, भारत के व्यापारिक निर्यात में विभिन्न देशों, विशेष रूप से विकसित देशों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। अप्रैल 2020- मार्च 2021 की तुलना में इस बार अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, नीदरलैंड, सिंगापुर, हांगकांग, ब्रिटेन, बेल्जियम और जर्मनी में निर्यात में क्रमश: 46.4%, 66.9%, 64.5%, 90.5%, 26.8%, 7.8%, 28%, 90.4% और 21.1% की वृद्धि हुई।

श्री गोयल ने कहा कि कोविड (दूसरी और तीसरी लहर) की लगातार लहरों से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, भारत के व्यापारिक वस्तुओं के व्यापार प्रदर्शन ने प्रभावशाली वृद्धि दिखाई है और अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के दौरान लगातार बारह महीनों तक निर्यात 30 अरब अमेरिकी डॉलर से ऊपर रहा है।

कृषि क्षेत्र में प्रभावशाली वृद्धि देखी गई है और विशेष रूप से महामारी के दौरान भारत खाद्य / आवश्यक कृषि उत्पादों के एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। कृषि निर्यात में उछाल चावल (बासमती और गैर-बासमती दोनों), समुद्री उत्पादों, गेहूं, मसालों और चीनी जैसी अन्य वस्तुओं की वजह से है, जिससे 2021-22 में अब तक के सबसे अधिक कृषि उत्पादों के निर्यात का रिकॉर्ड बना है।

देश से उच्च कृषि निर्यात 1.35 अरब लोगों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारतीय किसानों की क्षमता को दर्शाता है और दुनिया के बाकी हिस्सों में निर्यात करने के लिए भी अधिशेष अनाज का उत्पादन करता है। वैश्विक बाजार से जुड़ने से हमारे किसान अधिक प्रतिस्पर्धी और गुणवत्ता के प्रति जागरूक होंगे। इसके साथ ही वे अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य भी प्राप्त कर सकेंगे।

जब हमने कृषि उत्पादों के 50 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा था, तब बहुत कम लोगों ने सोचा था कि यह संभव होगा। लेकिन आज मैं अपने उन किसानों को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने कोविड-19 के बावजूद अधिक उत्पादन किया है। निर्यात में वृद्धि ने किसानों एवं श्रम प्रधान क्षेत्रों और एमएसएमई को मदद की है। श्री गोयल ने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों पर विशेष जोर देती है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि भारत यूक्रेन युद्ध से प्रभावित देशों को गेहूं की आपूर्ति बढ़ाएगा।

श्री गोयल ने कहा कि, “हम उन देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर गेहूं का निर्यात करना जारी रखेंगे, जिन्हें युद्ध-ग्रस्त क्षेत्रों से आपूर्ति नहीं मिल रही है। 2022-23 में हमारे गेहूं का निर्यात 10 मिलियन टन से अधिक होने की संभावना है। हमारे किसान उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।”

सरकार हमारे उद्योग और निर्यातकों को उनके निर्यात प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए एक अनुकूल वातावरण और बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है। निर्यातकों के लाभ के लिए निर्यात लक्ष्य के अनुरूप नीतियां और योजनाएं लाई जा रही हैं और उन्हें लागू भी किया जा रहा है। 

महामारी के बीच भी आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल का सुचारू रूप से फैलना सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। ब्याज समानीकरण योजना को निर्यातकों के लिए भी लागू कर दिया गया है और इससे बड़ी संख्या में एमएसएमई निर्यातकों को लाभ होने की संभावना है।

श्री गोयल ने कहा कि सरकार अब निर्यात की सुविधा के लिए जिला स्तर पर निर्यात बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए जिला निर्यात केंद्र पहल शुरू करने पर काम कर रही है। हम ओडीओपी और पीएलआई के माध्यम से हर जिले में निर्यात के बारे में जागरूकता पैदा करने में सफल रहे हैं।

वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण को मजबूत करने के लिए घरेलू क्षमता वृद्धि के लिए कठोर प्रयास उद्योग के साथ घनिष्ठ साझेदारी में काम करके उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए किए जा रहे हैं जहां भारत के प्रतिस्पर्धात्मक लाभ निहित हैं। सरकार हमारी क्षमताओं को मजबूत करने और मेक इन इंडिया की तर्ज पर दुनिया के लिए निर्माण करने पर काम कर रही है। वित्त वर्ष 2021-22 से शुरू होने वाले विनिर्माण के 13 प्रमुख क्षेत्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं की घोषणा की गई है।

स्त्रोत : पी.आई.बी.

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